Bihar Hijab Controversy: बिहार की सियासत और प्रशासनिक हलकों में चर्चित रहीं महिला आयुष चिकित्सक नुसरत परवीन की नौकरी ज्वाइनिंग को लेकर अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आखिरी तारीख बीत जाने के बावजूद नुसरत परवीन ने अब तक अपनी पोस्टिंग पर योगदान नहीं दिया है। इसी बीच राज्य सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए आयुष चिकित्सकों की ज्वाइनिंग की समय-सीमा बढ़ा दी है।
आयुष डॉक्टरों की ज्वाइनिंग डेट बढ़ी, नई डेडलाइन 31 दिसंबर 2025
राज्य स्वास्थ्य समिति ने आयुष चिकित्सकों के लिए राहत भरा कदम उठाते हुए ज्वाइनिंग की अंतिम तिथि अब 31 दिसंबर 2025 कर दी है। इस संबंध में समिति के कार्यकारी निदेशक अमित कुमार पांडेय की ओर से आधिकारिक पत्र जारी किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक 63 आयुष डॉक्टर अपनी-अपनी तैनाती वाली जगहों पर योगदान दे चुके हैं, लेकिन चयन सूची में शामिल डॉ. नुसरत परवीन की ओर से अभी तक कोई औपचारिक ज्वाइनिंग सूचना नहीं दी गई है। ऐसे में विभाग और आम जनता दोनों की नजरें अब उनके अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
हिजाब विवाद के बाद बढ़ी चर्चा
नुसरत परवीन उस वक्त सुर्खियों में आई थीं, जब एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़ा हिजाब विवाद सामने आया था। इस घटना के बाद मामला केवल प्रशासनिक न रहकर राजनीतिक बहस का विषय बन गया।

नीतीश कुमार के समर्थन में उतरे आनंद मोहन
हिजाब विवाद को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। पूर्व सांसद आनंद मोहन ने मुख्यमंत्री का बचाव करते हुए कहा कि जिन पर हिजाब हटाने जैसे आरोप लगाए जा रहे हैं, वही नेता बिहार की बेटियों के लिए हमेशा पिता समान रहे हैं।
जमुई में एक निजी कार्यक्रम के दौरान आनंद मोहन ने कहा कि आज बिहार की बेटियां सुरक्षा बलों में शामिल होकर देश की रक्षा कर रही हैं, जो मुख्यमंत्री की नीतियों का नतीजा है। उन्होंने हिजाब विवाद को “घटिया और दोयम दर्जे की राजनीति” बताया और दावा किया कि नुसरत परवीन जल्द ही नौकरी ज्वाइन कर इस पूरे विवाद पर विराम लगा देंगी।
क्या नुसरत परवीन हो सकती हैं ब्लैकलिस्ट?
सरकारी नियमों की बात करें तो यदि कोई चयनित अभ्यर्थी बार-बार अवसर मिलने के बावजूद तय समय सीमा में योगदान नहीं करता और कोई ठोस कारण या लिखित जवाब नहीं देता है, तो विभाग उसे नियुक्ति से वंचित कर सकता है। कुछ मामलों में भविष्य की भर्तियों के लिए सीमित अवधि तक ब्लैकलिस्ट किए जाने का प्रावधान भी होता है।
हालांकि, अब जब ज्वाइनिंग की तिथि बढ़ाकर 31 दिसंबर 2025 कर दी गई है, तो इस अवधि के भीतर यदि नुसरत परवीन योगदान कर देती हैं, तो उनके खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई या ब्लैकलिस्टिंग की स्थिति नहीं बनेगी।
आगे क्या?
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है। अब देखना होगा कि तय समय सीमा के भीतर नुसरत परवीन ज्वाइन करती हैं या नहीं। उनका फैसला न सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया बल्कि इस पूरे राजनीतिक विवाद की दिशा भी तय कर सकता है।












