बिहार के सरकारी प्रारंभिक विद्यालयों में चल रही मध्याह्न भोजन (मिड डे मील) योजना को लेकर शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य में लागू पायलट प्रोजेक्ट को 1 फरवरी 2026 से पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया गया है। इसके बाद स्कूलों में मिड डे मील का संचालन फिर से पुराने सिस्टम के तहत किया जाएगा।
क्यों बंद किया जा रहा है पायलट प्रोजेक्ट?
शिक्षा विभाग की मंशा थी कि पायलट प्रोजेक्ट के जरिए प्रधानाध्यापकों को मिड डे मील के प्रशासनिक कामों से मुक्त किया जाए, ताकि वे अपना अधिक समय पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों पर दे सकें। इसी उद्देश्य से कुछ जिलों के चयनित प्रखंडों में यह प्रयोग शुरू किया गया था, जहां प्रधानाध्यापक के बजाय किसी अन्य नामित शिक्षक के माध्यम से भोजन योजना संचालित हो रही थी।
मूल्यांकन में सामने आई बड़ी कमी
पायलट प्रोजेक्ट के प्रभाव का आकलन जब एक स्वतंत्र एजेंसी के माध्यम से कराया गया, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 70 प्रतिशत प्रधानाध्यापक अब भी किसी न किसी रूप में मिड डे मील के कार्यों में शामिल पाए गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि सहायक शिक्षकों का विद्यालय प्रशासन पर अपेक्षाकृत कम नियंत्रण होने के कारण प्रधानाध्यापकों का हस्तक्षेप बना रहा, जिससे योजना का मूल उद्देश्य पूरा नहीं हो सका।

1 फरवरी 2026 से क्या होगा नया?
शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार:
- पायलट प्रोजेक्ट का आगे कोई विस्तार नहीं किया जाएगा
- 1 फरवरी 2026 से सभी संबंधित विद्यालयों में पहले की तरह प्रधानाध्यापक और विद्यालय शिक्षा समिति के माध्यम से मिड डे मील का संचालन होगा
- सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) और मिड डे मील योजना के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश दे दिए गए हैं
शिक्षा व्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर?
हालांकि पायलट प्रोजेक्ट से उम्मीदें काफी थीं, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर इसके सफल न होने के कारण विभाग ने इसे समाप्त करने का निर्णय लिया है। अब देखना होगा कि पुरानी व्यवस्था में लौटने के बाद मिड डे मील की गुणवत्ता और पारदर्शिता को कैसे बेहतर बनाया जाता है, ताकि बच्चों को समय पर और पोषक भोजन मिल सके।












