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जनता की शिकायत पर फूटा डिप्टी सीएम का गुस्सा, ऑन स्पॉट सस्पेंशन से मचा हड़कंप

On: दिसम्बर 22, 2025 7:08 अपराह्न
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deputy cm vijay sinha action muzaffarpur revenue employee suspended

मुजफ्फरपुर: जिले में भूमि विवाद और राजस्व से जुड़े मामलों को लेकर सोमवार को आयोजित जन सुनवाई में उपमुख्यमंत्री सह भूमि राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सख्त रुख अपनाया। बड़ी संख्या में लोग अपनी जमीन संबंधी शिकायतें लेकर जन सुनवाई में पहुंचे, जहां उपमुख्यमंत्री ने एक-एक कर सभी मामलों को सुना।

भूमि मामलों में लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस

जन सुनवाई के दौरान जब मुशहरी अंचल के सतपुरा क्षेत्र में तैनात राजस्व कर्मचारी राकेश कुमार की गंभीर लापरवाही सामने आई, तो उपमुख्यमंत्री ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित करने और जिले से बाहर स्थानांतरण का आदेश दे दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जमीन से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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भ्रष्टाचार और अव्यवस्था पर अधिकारियों को फटकार

उपमुख्यमंत्री ने जिले में वर्षों से चले आ रहे भूमि विवाद, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता पर नाराजगी जताई। आम लोगों की शिकायतों के आधार पर कई अंचलाधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई गई। इसके साथ ही एक अंचलाधिकारी पर सरकारी जमीन बेचने के आरोप की जांच के आदेश भी दिए गए।

उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

गलत दाखिल-खारिज पर होगी कड़ी कार्रवाई

विजय कुमार सिन्हा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकारी जमीन में गलत तरीके से दाखिल-खारिज, जमाबंदी या किसी भी प्रकार की हेराफेरी पाई जाती है, तो कार्रवाई सिर्फ बर्खास्तगी तक सीमित नहीं रहेगी। ऐसे मामलों में दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों की संपत्ति जब्त करने तक की कार्रवाई की जाएगी।

सूचना देने वालों को मिलेगा सम्मान

जन सुनवाई के दौरान उपमुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि जो लोग सरकारी जमीन को निजी नाम से दर्ज कराने जैसे मामलों की जानकारी देंगे, उन्हें विभाग की ओर से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने इसे पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम बताया।

15 दिनों में निपटाए जाएं लंबित मामले

डिप्टी सीएम ने बताया कि वर्तमान में सबसे अधिक शिकायतें दाखिल-खारिज, परिमार्जन प्लस और ई-मापी को लेकर आ रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी लंबित मामलों का निष्पादन अगले 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाए, ताकि लोगों को बार-बार जनकल्याण संवाद और कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

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