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Bihar Politics: नीतीश के बाद अब लालू के लिए भारत रत्न! घर से निकाले गए तेजप्रताप ने पिता के समर्थन में खोला मोर्चा

On: जनवरी 11, 2026 12:29 अपराह्न
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Bihar Politics: बिहार की राजनीति में इन दिनों भारत रत्न को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। हाल ही में नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग उठी थी, जिसके बाद अब लालू प्रसाद यादव के नाम पर भी सियासत गरमा गई है। खास बात यह है कि यह मांग राष्ट्रीय जनता दल की ओर से नहीं, बल्कि लालू यादव के बेटे तेज प्रताप यादव ने की है, जो इन दिनों अलग राजनीतिक राह पर हैं।

नीतीश कुमार के बाद लालू यादव के लिए भारत रत्न की मांग

दरअसल, जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की सिफारिश की थी। इसी कड़ी में अब तेज प्रताप यादव ने अपने पिता लालू प्रसाद यादव को भी देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजे जाने की मांग सामने रखी है।

तेज प्रताप यादव बोले – सामाजिक न्याय के लिए योगदान अहम

जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने कहा कि जिस तरह नीतीश कुमार के लिए भारत रत्न की बात हो रही है, उसी तरह लालू प्रसाद यादव के योगदान को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, लालू यादव ने सामाजिक न्याय की राजनीति को मजबूती दी और वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाने का काम किया।

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“दोनों को मिले भारत रत्न” – तेज प्रताप का बयान

एक अन्य बयान में तेज प्रताप यादव ने कहा कि अगर नीतीश कुमार को भारत रत्न दिया जाता है, तो लालू प्रसाद यादव को भी यह सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों नेता कभी एक-दूसरे के बेहद करीबी रहे हैं और बिहार की राजनीति में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही है। ऐसे में दोनों को एक साथ सम्मानित किया जाना चाहिए।

चुनाव को लेकर भी बड़ा दावा

भारत रत्न की मांग के साथ-साथ तेज प्रताप यादव ने चुनावी रणनीति को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी देश के अलग-अलग राज्यों में होने वाले चुनावों में हिस्सा लेगी। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और केरल समेत जहां भी चुनाव होंगे, वहां जनशक्ति जनता दल अपनी मौजूदगी दर्ज कराएगी।

बिहार की सियासत में नया मोड़

भारत रत्न को लेकर उठी ये मांगें साफ तौर पर बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की ओर इशारा कर रही हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मुद्दे पर सियासी दल किस तरह अपनी रणनीति बनाते हैं और केंद्र सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।

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